दूरगामी दृष्टि-लक्ष्य-नैतिक मूल्य

दूरगामी दृष्टि

वैज्ञानिक तथा तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान में उत्कर्ष़ द्वारा भारत और विश्व के लिए योगदान करना; बहुमूल्य संसाधन के रूप में उद्योग तथा समाज की सेवा करना तथा समस्त भारतीयों के लिए गौरव का स्रोत बने रहना।

लक्ष्य

अद्यतन अनुसंधान में व्यस्त रहते हुए नवीन ज्ञान सृजित करना तथा समसामयिक ज्ञान से अलंकृत पूर्व-स्नातक एवं स्नातकोत्तर एवं विद्यावाचस्पति कार्यक्रम प्रस्तुत करके शैक्षिक विकास को बढ़ावा देना।

भारतीय, क्षेत्रीय तथा वैश्वीकृत आवश्यकताओं के बारे में प्राप्त बोध के आधार पर विशेषज्ञता के उन क्षेत्रों की पहचान करना जिन पर संस्थान अपना ध्यान केन्द्रित कर सके।

ऐसी सहयोगात्मक परियोजनाओं पर कार्य करना जो शैक्षिक संस्थानों एवं उद्योग जगत के बीच दीर्घकालिक अन्योन्यक्रिया के अवसर प्रदान करती हो।

मानवी अन्तःशक्तियों को अपनी सम्पूर्ण क्षमता में विकसित करना जिससे कि बौद्धिक रूप से सक्षम एवम् कल्पनाशील नेतृत्व व्यवसायों की श्रृँखला में उभर सके।

नैतिक मूल्य
  • शैक्षिक सत्यनिष्ठा एवं जवाबदेही।
  • हर व्यक्ति के विचारों का आदर एवं सहिष्णुता।
  • राष्ट्र एवं विश्व से सम्बन्धित महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केन्द्रित करना।
  • मानव विज्ञान के ज्ञान सहित व्यापक अवबोध।
  • बौद्धिक श्रेष्ठता तथा सर्जनात्मकता का मूल्यांकन।
  • अनुसंधान, तर्कपरकता तथा उद्यम की उन्मुक्त प्रवृत्ति।